बाबा को ढूंढता हूँ खाटू की हर गली में | baba ko dhundhta hu khatu ki har gali me

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जयपुर की हर गली में,
रींगस की हर गली में,
बाबा को ढूंढता हूँ,
खाटू की हर गली में।।

तर्ज – गोकुल की हर गली में।

खाटू गया तो सोचा,
मंदिर में बैठा होगा,
आते जाते प्रेमी को,
दर्शन वो देता होगा,
गुजरी की हर गली में,
गजरे की हर कली में,
बाबा को ढूँढता हूं,
खाटू की हर गली में।।

तोरण द्वार में ढूँढा,
श्याम कुंड में ढूँढा,
व्याकुल मन ने श्याम को,
कहाँ कहाँ नहीं ढूँढा,
नरसी की हर गली में,
कर्मा की हर गली में,
बाबा को ढूँढता हूं,
खाटू की हर गली में।।

कीर्तन में जाके देखा,
भजनो में श्याम होगा,
बनके सहारा अंकित की,
नैया चलता होगा,
श्यामा की हर गली में,
राधा की हर गली में,
बाबा को ढूँढता हूं,
खाटू की हर गली में।।

जयपुर की हर गली में,
रींगस की हर गली में,
बाबा को ढूंढता हूँ,
खाटू की हर गली में।।

गायिका – दीपिका आनंद।
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