बिन पानी के नाव चलाए,
केवल एक खिवैया है,
वृन्दावन में रहता है वो,
उसका नाम कन्हैया है।bd।
तर्ज – दीनानाथ मेरी बात।
ना ही कोई संत है वो,
ना ही कोई साधु है,
छोटा सा एक बालक है पर,
उसके हाथ में जादू है,
छोटी सी उंगली पर देखो,
गिरवर का धरैया है,
वृंदावन में रहता है वो,
उसका नाम कन्हैया है।bd।
ऐसे ऐसे काम किए भाई,
रख दिया हिला करके,
कैसे कैसे किए करिश्मे,
बांसुरी बजा करके,
छह गज की साड़ी ना उतरी,
ऐसा चीर बढ़ैया है,
वृंदावन में रहता है वो,
उसका नाम कन्हैया है।bd।
मुझसे पूछा कई भक्तों ने,
दिखने में वो कैसा है,
मैंने कहा दिल देकर देखो,
दीवानों के जैसा है,
दिल वालों पर जान लुटाए,
ऐसा दिल का लगैया है,
वृंदावन में रहता है वो,
उसका नाम कन्हैया है।bd।
उसकी भोली सूरत ऐसी,
सारा जमाना भूल गए,
चले गए बनवारी लेकिन,
वापस आना भूल गए चले,
बंसी बजाकर अपना बना ले,
ऐसा बंसी बजैया है,
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वृंदावन में रहता है वो,
उसका नाम कन्हैया है।bd।
बिन पानी के नाव चलाए,
केवल एक खिवैया है,
वृन्दावन में रहता है वो,
उसका नाम कन्हैया है।bd।
Singer – Aparna Mishra}]