तुम्हे श्याम के दर पे,
सबकुछ मिलेगा।
दोहा – रंग देते है नूर देते है,
बिन पिए सुरूर देते है,
अपने दर से मांगने वाले,
हर सवाली को,
बाबा श्याम कुछ न कुछ,
जरूर देते है।
तुम्हे श्याम के दर पे,
सबकुछ मिलेगा,
चरणों में सर को,
झुकाकर तो देखो,
खुशियों से दामन को,
तेरे भरेगा,
जरा इनको अपना,
बनाकर तो देखो।bd।
तर्ज – तुम्हे दिल्लगी।
झुकता नहीं कभी,
वो दुनिया के आगे,
जिसने सर झुकाया,
श्याम के आगे,
सहारा मिला सबको,
तुझे भी मिलेगा,
समर्पण में हाथ,
उठाकर तो देखो,
तुम्हें श्याम के दर पे,
सबकुछ मिलेगा,
चरणों में सर को,
झुकाकर तो देखो।bd।
श्याम नाम की चर्चा,
घर घर में होती,
जगती है पावन,
श्याम की ज्योति,
हरपल वो संग,
तेरे रहेगा,
श्याम से प्रीत,
लगाकर तो देखो,
तुम्हें श्याम के दर पे,
सबकुछ मिलेगा,
चरणों में सर को,
झुकाकर तो देखो।bd।
अमर हो गई जिनकी,
अमिट कहानी,
शीश का दानी मेरा,
बाबा कल्याणी,
सुनेगा ‘रजत’ मन की,
पीड़ तुम्हारी,
‘सुमित’ दर पे अर्जी,
लगाकर तो देखो,
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तुम्हें श्याम के दर पे,
सबकुछ मिलेगा,
चरणों में सर को,
झुकाकर तो देखो।bd।
तुम्हें श्याम के दर पे,
सबकुछ मिलेगा,
चरणों में सर को,
झुकाकर तो देखो,
खुशियों से दामन को,
तेरे भरेगा,
जरा इनको अपना,
बनाकर तो देखो।bd।
Singer – Sumit Saini}]