इस दर पे है कदर हमारी,
ऊँची इससे शान है क्या,
श्याम के प्रेमी कहलाते है,
इससे बड़ी पहचान है क्या।।
तर्ज – चेहरा है या चाँद खिला।
मात पिता ममता रखते है,
वैसी ममता श्याम रखे,
छोटी से छोटी बातों का,
श्याम हमेशा ध्यान रखे,
आस की डोरी ऐसी बंधी है,
छोड़ इसे जाती नहीं,
हाथ ये फैले दूजे दर पे,
वो नौबत आती नहीं,
बिन मांगे ही मिल जाता है,
इससे बड़ा इनाम है क्या,
श्याम के प्रेमी कहलाते हैं,
इससे बड़ी पहचान है क्या।।
मस्त है हम इसकी मस्ती में,
कुछ भी फ़िकर करते नहीं,
कदम कदम पर साथ है ये,
हालातों से डरते नहीं,
प्रेम ये जिनको श्याम का भाया,
और भी कुछ भाया है क्या,
दिल जाने है अपना हमने,
क्या खोया पाया है क्या,
पाया हमने सांवरिये को,
इससे बड़ा अरमान है क्या,
श्याम के प्रेमी कहलाते हैं,
इससे बड़ी पहचान है क्या।।
श्याम के प्रेमी के दिन होली,
रातें रोज दिवाली है,
‘निर्मल’ रख ना पाए इतनी,
दामन में खुशहाली है,
जब रहता है साथ में अपने,
खुद लीले असवार यही,
फिर क्या लेना दुनिया से,
हमको इसकी दरकार नहीं,
पहुंचे हम तो श्याम शरण में,
इससे बड़ा मकान है क्या,
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श्याम के प्रेमी कहलाते हैं,
इससे बड़ी पहचान है क्या।।
इस दर पे है कदर हमारी,
ऊँची इससे शान है क्या,
श्याम के प्रेमी कहलाते है,
इससे बड़ी पहचान है क्या।।
Singer – Sanju Sharma Ji}]