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अब पूरा करदे वचन,
गीता में जो तूने दिया,
संकट में है वो धरती,
जिसपे तूने जनम लिया,
अब पूरा करदे वचन,
गीता में जो तूने दिया।।
तर्ज – एक प्यार का नगमा है।
कैसी ये परीक्षा है,
जो दर्द दे जाते है,
अपने ही लोग मेरे,
मुझे देख न पाते है,
रो कर रह जाते है,
जिन्हें दुख हमनें न दिया,
संकट में हैं वो धरती,
जिसपे तूने जनम लिया।।
शमशानों में जगह नही,
अपनों को जलाने की,
कोई दवा नही जग में,
ये दर्द मिटाने की,
कोहराम मचा जग में,
दुख किसने इतना दिया,
संकट में वो धरती हैं,
जिसपे तूने जनम लिया।।
अब पूरा करदे वचन,
गीता में जो तूने दिया,
संकट में है वो धरती,
जिसपे तूने जनम लिया,
अब पूरा करदे वचन,
गीता में जो तूने दिया।।
गायक / प्रेषक – राजकुमार पाण्डेय।
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