मुझको बना दो मोर किशोरी | mujhko bana do mor kishori
मुझको बना दो मोर किशोरी,कुक कुक तुमको रिझाऊं मैं।। तर्ज – गोरी है कलैया। रज राजधानी को माथे से लगाउँ मैं,चरणामृत यमुना जल कंठ को पाउ मैं,छोटे छोटे पग से किशोरी,बरसाना दौड़ा चला आउ मै,मुझ को बनादो मोर किशोरी,कुक कुक तुमको रिझाऊं मैं।। लता पता वृक्षों के छाँव तले बैठ के,खग मृग संग लौटूं रमण … Read more