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ओ बाबा थाम ले तू आके,
मेरी पतवार को,
आँखे तरस गई है,
तेरे दीदार को।।
कई है कई है,
ठिकाने तुम्हारे,
मगर हम तो बैठे है,
तुम्हारे सहारे,
ओ बड़ी दरकार तेरी,
मेरे परिवार को,
आँखे तरस गई है,
तेरे दीदार को।
ओ बाबा, थाम ले तू आके,
मेरी पतवार को,
आँखे तरस गई है,
तेरे दीदार को।।
कभी तो तुम्हारी,
बजेगी मुरलिया,
बड़े भाग होंगे,
सजेगी ये बगिया,
आके देखना ही होगा,
अपने बीमार को,
आँखे तरस गई है,
तेरे दीदार को।
ओ बाबा, थाम ले तू आके,
मेरी पतवार को,
आँखे तरस गई है,
तेरे दीदार को।।
करूँ मौज ‘लहरी’,
ये तेरी मेहर है,
तेरा हाथ सर पे है,
मुझे क्या फ़िक्र है,
ओ पालता तू ही तो,
सारे संसार को,
आँखे तरस गई है,
तेरे दीदार को।
ओ बाबा थाम ले तू आके,
मेरी पतवार को,
आँखे तरस गई है,
तेरे दीदार को।।}]