नमस्ते नाथ अविनाशी तुम्हे मस्तक नवाते है लिरिक्स | namaste nath avinashi lyrics

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नमस्ते नाथ अविनाशी,
तुम्हे मस्तक नवाते है,
तुम्हारे ध्यान चिंतन में,
सभी आनंद पाते है,
नमस्तें नाथ अविनाशी,
तुम्हे मस्तक नवाते है।।

तर्ज – लगन तुमसे।

तुम्ही सर्वेश स्वामी हो,
तुम्ही भू हो भुवस्व: हो,
हृदय के तार हिलते है,
तभी हम गीत गाते है,
नमस्तें नाथ अविनाशी,
तुम्हे मस्तक नवाते है।bd।

तुम्ही जल में तुम्ही थल में,
नभोमंडल में व्यापक हो,
तुम्हारे विरुद वर्णन में,
ये पक्षी चह चहाते है,
नमस्तें नाथ अविनाशी,
तुम्हे मस्तक नवाते है।bd।

मिलेगी आज अनुभूति,
हृदय में देव दर्शन की,
अतः हम भक्ति पुष्पों से,
हृदय मंदिर सजाते है,
नमस्तें नाथ अविनाशी,
तुम्हे मस्तक नवाते है।bd।

नमस्ते नाथ अविनाशी,
तुम्हे मस्तक नवाते है,
तुम्हारे ध्यान चिंतन में,
सभी आनंद पाते है,
नमस्तें नाथ अविनाशी,
तुम्हे मस्तक नवाते है।।

गायक – धीरज कांत जी।
प्रेषक – अंकित पाटीदार।
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