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ना जाने कौन सा रिश्ता,
मेरा बाबा निभाता है,
अगर राहों में गिर जाऊं,
वो आकर के उठाता है,
ना जाने कौनसा रिश्ता,
मेरा मोहन निभाता है।।
तर्ज – जहाँ बनती है तकदीरें।
कभी बाबुल कभी मैया,
कभी भैया बना मेरा,
मैं हंसती हूँ तो हँसता हैं,
मैं रो दूँ तो मनाता है,
ना जाने कौनसा रिश्ता,
मेरा मोहन निभाता है।।
सदा संग है मेरे बाबा,
यही महसूस होता है,
वो बन राही सांवरिया जी,
मुझे रस्ता दिखाता है,
ना जाने कौनसा रिश्ता,
मेरा मोहन निभाता है।।
रसिक दरकार ना मुझको,
ये झूठे प्यार वालों की,
मेरा सब कुछ है सांवरिया,
जो इतना प्रेम लुटाता है,
ना जाने कौनसा रिश्ता,
मेरा मोहन निभाता है।।
ना जाने कौन सा रिश्ता,
मेरा बाबा निभाता है,
अगर राहों में गिर जाऊं,
वो आकर के उठाता है,
ना जाने कौनसा रिश्ता,
मेरा मोहन निभाता है।।
Singer – Didi Meenu Sharma}]