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मेरी पहचान साँवरे,
तेरे नाम से,
जीता हर एक दाव रे,
तेरे नाम से,
मेरी पहचान सांवरे,
तेरे नाम से।।
तर्ज – जियें तो जियें कैसे।
मीरा और नरसी ने भी,
यही नाम गाया है,
इसी ढाई अक्षर ने,
हर काम बनाया है,
विष को बनाया,
अमृत का प्याला,
लाज पर बनी तो,
श्याम ने संभाला,
मेरी पहचान सांवरे,
तेरे नाम से।।
पूछे मुझे चाहा तूने,
दर से क्या कमाया है,
गर्व से कहता हूँ,
तेरे नाम को पाया है,
श्याम प्रेमी कहलाऊ,
कम है क्या शोहरत,
कितना कुछ मिला इस,
नाम की बदौलत,
मेरी पहचान सांवरे,
तेरे नाम से।।
इतना सा तजुर्बा ये,
श्याम हमारा है,
तुमसे बड़ा प्रभु ये,
नाम तुम्हारा है,
‘सोनू’ के जीवन का,
ऐसा अंजाम हो,
जिस पल रुके ये सांसे,
लब पर तेरा नाम हो,
मेरी पहचान सांवरे,
तेरे नाम से।।
मेरी पहचान साँवरे,
तेरे नाम से,
जीता हर एक दाव रे,
तेरे नाम से,
मेरी पहचान सांवरे,
तेरे नाम से।।
स्वर – रेशमी शर्मा।}]