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मौज लेते है,
हम मौज लेते हैं,
नहीं मिले तो श्याम कृपा से,
खोज लेते है।।
जो है श्याम दीवाने,
वो तो सब हैं मस्ती में,
चार चांद लग गए प्रेम के,
उनकी हस्ती में,
श्याम नाम अमृत का सेवन,
रोज लेते है,
नहीं मिले तो श्याम कृपा से,
खोज लेते है।।
चस्का सा पड़ गया है अब तो,
खाटू जाने का,
खाटू जाकर मन करता,
वहीं रोज रहने का,
कार्तिक सावन फागुन,
ओर आसोज लेते है,
नहीं मिले तो श्याम कृपा से,
खोज लेते है।।
‘रवि’ कहे जो आते एकबर,
श्याम की नगरी में,
ना घूमें वो दुनिया की,
इस झूठी चकरी में फिर,
सांवरिये की किरपा,
भर भर गोज लेते है,
नहीं मिले तो श्याम कृपा से,
खोज लेते है।।
मौज लेते है,
हम मौज लेते हैं,
नहीं मिले तो श्याम कृपा से,
खोज लेते है।।
Singer – Ravi Sharma
Sriganganagar 7062534590}]