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मनमोहनी है छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा नजरें हमारी।।
तर्ज – सागर किनारे।
सिर पे मुकुट और कानों में कुंडल,
माथे पे हीरा आंखें ये चंचल,
अधरों पे लगती मुरली है प्यारी,
मनमोहनी हैं छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा नजरें हमारी।।
पुष्पों की माला से बागा सजा है,
उस पे सुगंधित इत्र लगा है,
महक रहे हो श्याम बिहारी,
मनमोहनी हैं छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा नजरें हमारी।।
दरबार तेरे जो दर्शन को आए,
भक्त जो देखे तुझे देखता ही जाए,
‘आकाश’ गूंजे जय कार थारी,
मनमोहनी हैं छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा नजरें हमारी।।
मनमोहनी है छवि ये तुम्हारी,
हटती नहीं है बाबा नजरें हमारी।।
Singer & Lyricist – Aakash Sharma}]