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मैं खाटू जाऊंगा,
फागण को आने दो,
फागण को आने दो।।
तर्ज – सावन को आने दो।
भक्तों की होंगी कतारें,
मेले की होंगी बहारें,
खाटू की गलियों में देखो,
बाबा के गूंजे जयकारे,
अब मैं न मानूंगा,
रींगस से चलकर मैं,
निशान उठाऊंगा,
फागण को आने दो,
फागण को आने दो।।
देखो यह शान हमारी,
हम हैं बाबा के पुजारी,
खाटू में बैठा है बाबा,
जाएंगे बन के भिखारी,
अब मैं न मानूंगा,
मंदिर में जाकर मैं,
निशान चढ़ाऊँगा,
फागण को आने दो,
फागण को आने दो।।
फागण में रंग रस बरसे,
प्यासा मन मिलने को तरसे,
कहता है ‘गिरधर’ सबसे,
आओ निकल चलें घर से,
अब मैं तो जाऊंगा,
उसको रिझाऊँगा,
यह गीत गाऊंगा,
फागण को आने दो,
फागण को आने दो।।
मैं खाटू जाऊंगा,
फागण को आने दो,
फागण को आने दो।।
– गायक एवं शब्द रचना –
गिरधर महाराज जी।
9300043737
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