लहरों में क्यों फसाई रे कन्हैया मेरी नैया | laharo me kyo fasai re kanhaiya meri naiya

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लहरों में क्यों फसाई रे,

दोहा – जिंदगी के झमेले,
कभी कम नहीं होते,
लेगा कब सुध सांवरे,
जब हम नहीं होंगे,
तेरा किया तू जाने कन्हैया,
मैं तो पड़ा तेरी चरणों में।

लहरों में क्यों फसाई रे,
कन्हैया मेरी नैया,
नैया मेरी कन्हैया मेरी,
नैया मेरी कन्हैया मेरी,
लहरो में क्यों फसाई रे।।

तर्ज – बना के क्यों बिगाड़ा रे।

थाम के उंगली तेरी कन्हैया,
जीवन मैंने गुजार दिया,
अच्छा भला जो कुछ था मुझ पर,
सब कुछ तुझ पर वार दिया,
छोड़ तुझे अब जाऊं कहां मैं,
कोई नहीं मेरा इस जहां में,
बता दे रे कन्हैया,
नैया मेरी कन्हैया मेरी,
नैया मेरी कन्हैया मेरी,
लहरो में क्यों फसाई रे।।

आंसू मेरे रोक न पाया,
कैसी तेरी मजबूरी है,
मैं तो पास हूं तेरे कन्हैया,
फिर भी ये कैसी दूरी है,
समझ ना पाऊं लीला तेरी,
कब ये कटेगी रात अंधेरी,
बता दे रे कन्हैया,
नैया मेरी कन्हैया मेरी,
नैया मेरी कन्हैया मेरी,
लहरो में क्यों फसाई रे।।

बीच भंवर में नैया मेरी,
गुड़ गुड़ गोते खाती है,
अच्छी भली बातें बनते बनते ना,
क्यों बन पाती है,
समझ न पाऊं लीला तेरी,
कब ये कटेगी रात अंधेरी,
बता दे रे कन्हैया,
नैया मेरी कन्हैया मेरी,
नैया मेरी कन्हैया मेरी,
लहरो में क्यों फसाई रे।।

लहरों में क्यों फसाई रे,
कन्हैया मेरी नैया,
नैया मेरी कन्हैया मेरी,
नैया मेरी कन्हैया मेरी,
लहरो में क्यों फसाई रे।।

गायन / रचना – लक्ष्मी नारायण आचार्य।
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