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दीनों का दीनानाथ,
हारे का सहारा है,
खाटू में जो बैठा,
बाबा श्याम हमारा है।।
जग से हुए हारे का,
साथी बन जाता है,
साथी बनकर उसको ये,
जीत दिलाता है,
भक्तों के सब दुखड़े-2,
पल भर में मिटाता है,
दीनो का दीनानाथ,
हारे का सहारा है।।
डूबती हुई नैया का,
मांझी बन जाता है,
जब याद करो इसको,
लीले चढ़ आता है,
ये अपने हाथों से-2,
पतवार चलाता है,
दीनो का दीनानाथ,
हारे का सहारा है।।
रोती हुई आंखों में,
खुशियां ये लाता है,
आंखों को पोछकर ये,
गले लगाता है,
ये दिलीप भी इसकी-2,
महिमा को गाता है,
दीनो का दीनानाथ,
हारे का सहारा है।।
दीनों का दीनानाथ,
हारे का सहारा है,
खाटू में जो बैठा,
बाबा श्याम हमारा है।।
लेखक / प्रेषक – दिलीप अग्रवाल
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