दिल दीवाना ना जाने कब हो गया,
जबसे तुमको देखा मैं तो खो गया,
मैं खो गया कुछ हो गया,
कुछ हो गया मेरे श्याम,
दिल दिवाना ना जाने कब हो गया,
जबसे तुमको देखा मैं तो खो गया।।
तर्ज – दिल दीवाना ना जाने कब।
हारे के तू साथ है,
मोरछड़ी तेरे हाथ हैं,
जग से है जो हार गया,
उसका तूने साथ दिया,
हर पल तेरा ख्वाब आने लगा,
ये कैसा नशा छाने लगा,
कुछ हो गया कुछ हो गया,
कुछ हो गया मेरे श्याम,
दिल दिवाना ना जाने कब हो गया,
जबसे तुमको देखा मैं तो खो गया।।
ग्यारस की ये रात है,
भजनो की बरसात है,
गाये ऐसे आज हम,
बाबा अपने साथ है,
ये सिलसिला युही चले,
दर पे तेरे हम आते रहे,
कुछ हो गया कुछ हो गया,
कुछ हो गया मेरे श्याम,
दिल दिवाना ना जाने कब हो गया,
जबसे तुमको देखा मैं तो खो गया।।
बिखरू ऐसे आज मैं,
इस चोखट पर टूट कर,
हाय ऐसे फर्श पर,
शिशा गिरे टूट कर
‘मोहित’ कहे क्या हो गया,
दिल ये तेरा दीवाना हुआ,
कुछ हो गया कुछ हो गया,
कुछ हो गया मेरे श्याम,
दिल दिवाना ना जाने कब हो गया,
जबसे तुमको देखा मैं तो खो गया।।
दिल दीवाना ना जाने कब हो गया,
जबसे तुमको देखा मैं तो खो गया,
मैं खो गया कुछ हो गया,
कुछ हो गया मेरे श्याम,
दिल दिवाना ना जाने कब हो गया,
जबसे तुमको देखा मैं तो खो गया।।
Sent By – Singer Mohit Sharma,
Ph. – 8003870075
Video Not Available}]