ना जाने किस रूप में आकर काम मेरा कर जाता है लिरिक्स | na jane kis roop me aakar kaam mera kar jata hai lyrics
ना जाने किस रूप में आकर,काम मेरा कर जाता है,जब भी दिल से श्याम पुकारू,लीले चढ़ आ जाता है।। तर्ज – तेरी कृपा से श्याम प्रभु। दर दर भटक रहा था मैं तो,मिलता नहीं सहारा,जीवन नईया बीच भंवर में,दूर बहुत था किनारा,बनकर मांझी मझधार से,पार मुझे कर जाता है,जब भी दिल से श्याम पुकारू,लीले चढ़ … Read more