ना कर इतना सितम मोहन हम इस जग के सताए है | na kar itna sitam mohan
ना कर इतना सितम मोहन,हम इस जग के सताए है,हारे है खुद से ही बाबा,तभी तेरे दर पे आये है।। तर्ज – लगन तुमसे लगा बैठे। तेरी रेहमत के किस्से सुन,जगा विश्वास ये मन में,बदल देगा तू किस्मत को,यही उम्मीद लाये है।। क्यों पत्थर बन के बैठे हो,ज़रा नज़रें मिलाओ तो,ना जाने कितने अश्क़ों को,इन … Read more