मेरे मन के मंदिर में मूरत है श्याम की | mere man ke mandir me murat hai shyam ki
मेरे मन के मंदिर में,मूरत है श्याम की,आंखों में बस गई,सूरत है श्याम की,जमाने की मुझको,परवाह नहीं है,दीवानी हूँ मैं,खाटू वाले के नाम की।bd। तर्ज – तुम्ही मेरे मंदिर। दुनिया के दर्दों गम की,मारी हुई हूँ,हारे का सहारा तो मैं,हारी हुई हूँ,पुजारन हुई तन मन से,उनके मैं नाम की,आंखों में बस गई,सूरत है श्याम की।bd। … Read more