यही रात अंतिम यही रात भारी रामायण भजन लिरिक्स | yahi raat antim yahi raat bhari lyrics in hindi
यही रात अंतिम यही रात भारी,बस एक रात की अब कहानी है सारी,यही रात अंतिम यहीं रात भारी।। नहीं बंधू बांधव ना कोई सहायक,अकेला है लंका में लंका का नायक,सभी रत्न बहुमूल्य रण में गंवाए,लगे घाव ऐसे की भर भी ना पाए,दशानन इसी सोच में जागता है,की जो हो रहा उसका परिणाम क्या है,ये बाजी … Read more