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फूलों से सजाया है,
दरबार मेरी मैया,
बिगड़ी बनाने आजा,
एक बार मेरी मैया।।
माँ के दरबार में जो,
भक्त सर झुकाते हैं,
वो रोते रोते आते,
हंसते हुए जाते है,
तेरे चरण से जिंदगी,
उजियार मेरी मैया,
बिगडी बनाने आजा,
एक बार मेरी मैया।।
माँ के दरबार में जो,
सच्चे मन से आते हैं,
मां के दरबार में जो,
हाजिरी लगाते है,
कर दे करम तू मुझ पर,
एक बार मेरी मैया,
बिगडी बनाने आजा,
एक बार मेरी मैया।।
फूलों से सजाया है,
दरबार मेरी मैया,
बिगड़ी बनाने आजा,
एक बार मेरी मैया।।
स्वर – जुली सिंह।
प्रेषक – मोहन राजपूत।
9893960861