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बात अलग है खाटू वाले,
श्याम तेरे दरबार की,
आदत सी है इन अँखियों को,
श्याम तेरे दीदार की।।
शीश मुकुट पे मोर की पंखिया,
जादूगरी है श्याम तेरी अँखियाँ,
चमक अनोखी श्याम तेरे इस,
गल वैजन्ती हार की,
बात अलग है खाटु वाले,
श्याम तेरे दरबार की।।
मोरछड़ी जो तेरी लहराए,
लगता यूँ चलती हो पावन हवाएं,
खुशियां भरी है तेरे दामन में,
इस सारे संसार की,
बात अलग है खाटु वाले,
श्याम तेरे दरबार की।।
ऊँची अटारी बैठा मुरारी,
झोली भरे सबकी ये बारी बारी,
‘गोलू’ श्याम की राहें है बस,
जीवन के उद्धार की,
बात अलग है खाटु वाले,
श्याम तेरे दरबार की।।
बात अलग है खाटू वाले,
श्याम तेरे दरबार की,
आदत सी है इन अँखियों को,
श्याम तेरे दीदार की।।
Singer – Ashish Srivastava}]