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दरबार तुम्हारा श्याम,
दुनिया से निराला है,
तेरी मस्ती का रंग ऐसा,
हर कोई मतवाला है,
दरबार तूम्हारा श्याम,
दुनिया से निराला है।।
तर्ज – बाबुल का ये घर।
तेरी ज्योति का चम चम,
चमके उजियारा है,
रंगी फिजा तेरी,
बड़ा दिलकश नजारा है,
तेरे दर पे लगा बाबा,
खुशियों का मेला है,
दरबार तूम्हारा श्याम,
दुनिया से निराला है।।
सिमटे है सभी तीरथ,
तेरे दर पे मेरे दाता,
दर्शन सब धामों का,
तेरे दर पे ही मिल जाता,
भक्ति की खुशबु का,
यहाँ रंग निराला है,
दरबार तूम्हारा श्याम,
दुनिया से निराला है।।
चौखट ये निराली है,
दामन भर जाता है,
रिद्धि सिद्धि बैठी दर पे,
कोई खाली नहीं जाता है,
‘सुरेश’ मगन पि के,
तेरे नाम का प्याला है,
दरबार तूम्हारा श्याम,
दुनिया से निराला है।।
दरबार तुम्हारा श्याम,
दुनिया से निराला है,
तेरी मस्ती का रंग ऐसा,
हर कोई मतवाला है,
दरबार तूम्हारा श्याम,
दुनिया से निराला है।।}]