खाटू वाले श्याम धनी कब धाम बुलावेगो | khatu wale shyam dhani kab dham bulaoge

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खाटू वाले श्याम धनी,
कब धाम बुलावेगो,
ओ सांवरे,
हमारे घर कब आवेगो।।

तर्ज – मतलब की इस दुनिया से।

बलहारी तेरी अलकन पे,
केसर मोती के झलकन पे,
खाटूश्याम हमारे,
बिगड़े काम बनावेगो,
ओ सांवरे,
हमारे घर कब आवेगो।।

तन-मन-धन तीनों से हारो,
हारे कूं अब देओं सहारो,
बन के खेवैया नैया मेरी,
पार लगावेगो,
ओ सांवरे,
हमारे घर कब आवेगो।।

ध्रुव प्रहलाद भक्त तैने तारे,
दर्शन की अभिलाषा प्यारे,
आ करके मेरे जीवन की,
ज्योत जलावेगो,
ओ सांवरे,
हमारे घर कब आवेगो।।

आजा आजा ओ मेरे खाटू,
हार गयो दिन गिन-गिन काटू,
बनवारी भी ब्रज-मंडल में,
धूम मचावेगो,
ओ सांवरे,
हमारे घर कब आवेगो।।

खाटू वाले श्याम धनी,
कब धाम बुलावेगो,
ओ सांवरे,
हमारे घर कब आवेगो।।

स्वर – श्यामसुंदर दीक्षित।
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