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दानी के दरबार में,
महादानी के दरबार मे,
आया रे मैं तो आया,
दानी के दरबार मे।।
हे दानी मैं हार के आया,
मुझको आज जिताना होगा,
नाम तेरा सुनकर आया हूँ,
मुझको गले लगाना होगा,
आया रे मैं तो आया,
दानी के दरबार मे।।
तेरे दर पे हार गया तो,
और कहाँ मैं जाऊँगा,
जिनका भरोसा तुझपे उनसे,
कैसे आँख मिलाऊँगा,
आया रे मैं तो आया,
दानी के दरबार मे।।
चमत्कार दिखलाना होगा,
मेरा काम बनाना होगा,
दिव्य तेजस्वी मोरछड़ी का,
झाड़ा आज लगाना होगा,
आया रे मैं तो आया,
दानी के दरबार मे।।
तेरा दर ही आखिरी दर है,
इस विश्वास से आया हूँ,
भक्तों के संग ‘अम्बरीष’ कहता,
लाख उम्मीदे लाया हूँ,
आया रे मैं तो आया,
दानी के दरबार मे।।
दानी के दरबार में,
महादानी के दरबार मे,
आया रे मैं तो आया,
दानी के दरबार मे।।
Singer – Rakesh Bawaliya
Writer – Ambrish Kumar Mumbai
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