आई जो रुत फाग की आई सजल अखियां मुसकाई | aayi jo rut faag ki aayi

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आई जो रुत फाग की आई,
सजल अखियां मुसकाई,
सबके दिलों पे छाए  श्याम जी,
हाथों में निशान उठाए,
श्याम के नारे है,
 खाटू से रिंगस के क्या,
ये खूब नजारे है,
मौका ही ऐसा है,
सारे खाटू जायेंगे,
आया मेला फागण का,
हम श्याम रिझायेंगे।।

तर्ज – अरे रे मेरी जान है।

सज गई खाटू नगरी,
ऐसी रौनक आई है,
श्याम प्रेमियों में गजब की,
खुशियां छाई है,
सबने थी जो बाट जुहारी,
दिन वो आया है,
मस्ती में सब खोए सबको,
श्याम ही भाया है,
आयी जो रुत फाग की आयी,
सजल अखियां मुसकाई,
सबके दिलों पे छाए श्याम जी।।

कोई पैदल चलके,
अर्जी लेकर आता है,
कोई प्यार दिखाता जैसे,
गहरा नाता है,
कोई मेले में नाचे और,
शोर मचाता है,
फागुन ग्यारस धोक लगा,
कोई शीश झुकाता है,
आयी जो रुत फाग की आयी,
सजल अखियां मुसकाई,
सबके दिलों पे छाए श्याम जी।।

फागुन में जो श्याम धनी के,
द्वारे जाता है,
खुश होकर के सेठ सांवरा,
गले लगाता है,
प्रेमी के संग में ये ऐसा,
रंग जमाता है,
‘नेहा’ की ये ध्वजा सांवरा,
खुद लहराता है,
आयी जो रुत फाग की आयी,
सजल अखियां मुसकाई,
सबके दिलों पे छाए श्याम जी।।

आई जो रुत फाग की आई,
सजल अखियां मुसकाई,
सबके दिलों पे छाए श्याम जी,
हाथों में निशान उठाए,
श्याम के नारे है,
खाटू से रिंगस के क्या,
ये खूब नजारे है,
मौका ही ऐसा है,
सारे खाटू जायेंगे,
आया मेला फागण का,
हम श्याम रिझायेंगे।।

Singer – Prateek Mishra
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