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तेरी भोली सी सूरतिया,
मेरे मन में गई समाए,
रे सांवरिया नंद किशोर,
रे सांवरिया नंद किशोर।।
मोर मुकुट कटि काजनी सोहे,
गल वैजन्ती माल,
कानन कुंडल नासा मोती,
और घुंघराले बाल,
तेरे नैना बड़े रसीले,
मेरे मन के है चितचोर,
रे सांवरिया नंद किशोर,
रे सांवरिया नंद किशोर।।
एक दिन मिल गयो मोहे डगर में,
बरबस लई बुलाए,
कर बरजोरी मोरी बईया मरोड़ी,
मंद मंद मुस्काए,
माखन की मटकी फोड़,
तोड़ मेरे हसन लग्यो मुख मोड़,
रे सांवरिया नंद किशोर,
रे सांवरिया नंद किशोर।।
तेरी भोली सी सूरतिया,
मेरे मन में गई समाए,
रे सांवरिया नंद किशोर,
रे सांवरिया नंद किशोर।।
स्वर – गोविन्द भार्गव जी।
प्रेषक – ऋषि विजयवर्गीय।
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