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हे दीनबंधु दयालु कहाँ हो,
मैं ग़म का मारा,
लेने सहारा,
आया हूँ दर पे तेरे,
मुझे भी निभाओ,
हे दीनबंधू दयालु कहाँ हो।।
तर्ज – मुझे श्याम अपने गले से।
आ गया मैं शरण,
साँवरे आपकी,
है उम्मीदें बड़ी,
मुझको इंसाफ की,
खड़ा हूँ मैं बाबा,
तेरे कठघरे में,
न्यायधीष मेरा भी,
न्याय चुकाओ,
हे दीनबंधू दयालु कहाँ हो।।
जा के किस से कहूँ,
मैं मेरी बेबसी,
जग उड़ाने लगा,
अब तो मेरी हँसी,
प्रभु तुमको अपने,
वचन की कसम है,
माँ को दिया वो,
फ़र्ज़ निभाओ,
हे दीनबंधू दयालु कहाँ हो।।
तुच्छ हूँ मैं प्रभु,
सर्वव्यापी है तू,
दोष मुझमें कई,
मैं हूँ पापी प्रभु,
निर्दोष हैं पर,
परिवार मेरा,
जग के सितम से ‘माधव’,
उनको बचाओ,
हे दीनबंधू दयालु कहाँ हो।।
हे दीनबंधु दयालु कहाँ हो,
मैं ग़म का मारा,
लेने सहारा,
आया हूँ दर पे तेरे,
मुझे भी निभाओ,
हे दीनबंधू दयालु कहाँ हो।।
Singer – Shubham Rupam}]