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हारे के तुम साथी,
कहलाते बाबा श्याम,
खाटू में जाकर देखो,
बनते बिगड़े हर काम।।
तर्ज – सावन का महीना।
हारे हुओं को बाबा,
देते सहारा,
टूटी हुई कश्तियों को,
मिलता किनारा,
श्याम नाम के सहारे,
मैं करता हूँ आराम,
हारें के तुम साथी,
कहलाते बाबा श्याम।।
कर विश्वास सारी,
दुनिया है आई,
जिसने भी लिया नाम,
विपदा ना पाई,
कैसे भूलूँ कान्हा,
जो तुमने किए उपकार,
हारें के तुम साथी,
कहलाते बाबा श्याम।।
तेरे नाम से ही हमको,
मिली पहचान है,
तेरे भरोसे चलता,
मेरा ये परिवार है,
‘जय’ की तो सुन लेता,
बाबा ये करुण पुकार,
हारें के तुम साथी,
कहलाते बाबा श्याम।।
हारे के तुम साथी,
कहलाते बाबा श्याम,
खाटू में जाकर देखो,
बनते बिगड़े हर काम।।
Singer & Lyrics – Jay Goyal}]