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तक़दीर पे मेरी तुमने,
जो किये है लाखो करम,
अहसान है तेरे कितने,
शब्दों में कहे क्या हम,
तू ही है मेरा साथी साथी,
जीवन साथी साथी,
एक तू ही मेरा हमदम।।
तर्ज – सीखा मैंने जीना जीना।
दुनिया ने जब ठुकराया,
बेबस समझ के सताया,
ऐसे में मुझको बचाया,
तुमने प्रभु हरदम,
जख्मों पे भी लगाया है,
तुमने सदा मरहम,
अहसान है तेरे कितने,
शब्दों में कहे क्या हम,
तू ही है मेरा साथी साथी,
जीवन साथी साथी,
एक तू ही मेरा हमदम।।
सच्ची है सारी वो बातें,
‘मोहित’ ने जो भी लिखी है,
मुझको सहारा दिया है,
तुमने प्रभु हरदम,
शुकराना मैं करूँ तेरा,
मेरी आँखे हुई है नम,
तू ही है मेरा साथी साथी,
जीवन साथी साथी,
एक तू ही मेरा हमदम।।
तक़दीर पे मेरी तुमने,
जो किये है लाखो करम,
अहसान है तेरे कितने,
शब्दों में कहे क्या हम,
तू ही है मेरा साथी साथी,
जीवन साथी साथी,
एक तू ही मेरा हमदम।।
Singer – Babita Soni}]