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मैं जबसे तेरा साँवरा हो गया,
कल क्या था मैं आज क्या हो गया।।
जीवन की बगिया सुखी हुई थी,
बहारे भी मुझसे रूठी हुई थी,
वही बाग़ फिर से हरा हो गया,
कल क्या था मैं आज क्या हो गया।।
मेरे साथ चलती थी बदनसीबी,
हारा मैं हरदम ना जीता कभी भी,
अब जीत का सिलसिला हो गया,
कल क्या था मैं आज क्या हो गया।।
दर्द था दिल में अँखियों पानी,
‘सोनू’ मिला ना था जब तुमसा दानी,
मेरे दर्दे दिल की दवा बन गया,
कल क्या था मैं आज क्या हो गया।।
मैं जबसे तेरा साँवरा हो गया,
कल क्या था मैं आज क्या हो गया।।
गायक – राजू मेहरा}]