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कोई भूल हो तो मुझे टोकना,
मगर श्याम अपनी किरपा,
नहीं रोकना,
कोई भूल हों तो मुझे टोकना।।
तर्ज – तेरे संग प्यार मैं नहीं।
तेरे चरणों की धूल से ही सांवरे,
मुझको जीने का आया सलीका,
फर्क सच झूठ का तेरी किरपा से ही,
मैंने इस जग में सांवरे सीखा,
मेरी झूठ से तू राहे नहीं जोड़ना,
कोई भूल हों तो मुझे टोकना।।
एक कतरा था मैं तो ज़मीन का मगर,
तेरी रहमत का आकाश पर हूँ,
तूने जब से फिकर की मेरे सांवरे,
हर चिंता से मैं बेफिकर हूँ,
कभी साथ मेरा तू नहीं छोड़ना,
कोई भूल हों तो मुझे टोकना।।
तेरे आगे सदा हाथ फैले रहे,
मेरी औकात इतनी ही रखना,
ना किसी यार के आगे फैले कभी,
श्याम इतनी दया सिर्फ करना,
मेरी आंख के ये आंसू तुम्ही पोंछना ,
कोई भूल हों तो मुझे टोकना।।
कोई भूल हो तो मुझे टोकना,
मगर श्याम अपनी किरपा,
नहीं रोकना,
कोई भूल हों तो मुझे टोकना।।
स्वर – प्रशांत सूर्यवंशी।}]