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आज सुणाई करणी पड़सी,
छोटो सो मेरो काम है,
भोत घणेरी आस लगाकै,
आयो थारो दास है।।
तर्ज़ – थाली भरकै ल्याई रे खिचड़ो।
लखदातार कुहावै रे बाबो,
खाली झोली भर देवै,
दीन दुखी दरवाजै आवै,
सारा संकट हर लेवै,
जो भी आवै थां रै द्वारै-२,
जावै नहीं निराश है,
भोत घणेरी आस लगाकै,
आयो थारो दास है।।
बार बार थां की चोखट पर,
आस लगाकै आऊं मैं,
छोड तेरो दरबार सांवरा,
कुण कै दर पर जाऊं मैं,
इकबर हंसकर देख ले दाता-२,
मनड़ो भोत उदास है,
भोत घणेरी आस लगाकै,
आयो थारो दास है।।
द्वार दया रो खोल सांवरा,
क्यों तू आंख चुरावै है,
सूत्या भाग्य जगा दे रे बाबा,
क्यों इतरो तरसावै है,
मेरी किस्मत की ताली तो-२,
बाबा थां रै पास है,
भोत घणेरी आस लगाकै,
आयो थारो दास है।।
आज सुणाई करणी पड़सी,
छोटो सो मेरो काम है,
भोत घणेरी आस लगाकै,
आयो थारो दास है।।
– भजन प्रेषक –
विवेक अग्रवाल जी।
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